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हाइड्रोजन मोबिलिटी पायलट / India’s Green Hydrogen Mobility Pilot
12 दिसंबर 2025 – दैनिक करंट अफेयर्स
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने 11 दिसंबर 2025 को हाइड्रोजन मोबिलिटी क्षेत्र में फील्ड ट्रायल के लिए पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है, जिसे भारत की स्वच्छ ऊर्जा प्रगति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया गया है। इस पहल के तहत NISE (नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सोलर एनर्जी) और टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसके अंतर्गत टोयोटा मिराई हाइड्रोजन फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल (FCEV) का भारत की विविध सड़क और जलवायु परिस्थितियों में व्यापक मूल्यांकन किया जाएगा। यह परीक्षण दो साल तक चलेगा और इससे हाइड्रोजन मोबिलिटी के राष्ट्रव्यापी विस्तार के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। ग्रीन हाइड्रोजन को भारत की भविष्य की ऊर्जा प्रणालियों की रीढ़ के रूप में देखा जा रहा है और यह पहल पंचामृत जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है, जो “ऊर्जा आत्मनिर्भरता” को मजबूत करने का काम करेगी।
📘 मुख्य तथ्य (Important Points)
| 👉 | पायलट प्रोजेक्ट का उद्घाटन नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने 11 दिसंबर 2025 को किया। |
| 👉 | परियोजना के तहत NISE और टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। |
| 👉 | टोयोटा मिराई हाइड्रोजन फ्यूल सेल वाहन (FCEV) का भारतीय परिस्थितियों (गर्मी, धूल, यातायात भीड़, विविध इलाके) में दो साल तक मूल्यांकन किया जाएगा। |
| 👉 | मिराई एक दूसरी पीढ़ी का हाइड्रोजन फ्यूल सेल वाहन है, जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक अभिक्रिया से बिजली बनाता है और केवल जल वाष्प उत्सर्जित करता है। |
| 👉 | मिराई की लगभग 650 किलोमीटर की ड्राइविंग रेंज है और इसे पाँच मिनट से कम समय में ईंधन भरा जा सकता है। |
| 👉 | मंत्री श्री जोशी ने वाहन को स्वयं संसद भवन तक चलाकर यह संदेश दिया कि हाइड्रोजन मोबिलिटी भारतीय परिस्थितियों के लिए तैयार है। |
| 👉 | यह पहल भारत की राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (जनवरी 2023 में लॉन्च) के तहत की गई है। |
| 👉 | परियोजना का उद्देश्य उद्योग, शिक्षा जगत और नीति निर्माताओं के बीच जागरूकता, विश्वास और तकनीकी क्षमता का निर्माण करना है। |
| 👉 | हाइड्रोजन फ्यूल सेल वाहन शांत, स्वच्छ और उत्सर्जन मुक्त होते हैं, केवल पानी का उत्सर्जन करते हैं। |
| 👉 | परियोजना भारत की पंचामृत जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है और “ऊर्जा आत्मनिर्भरता” को मजबूती प्रदान करती है। |
| 👉 | कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री श्री श्रीपद येस्सो नाईक ने भाग लिया और कहा कि यह पहल एक स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। |
| 👉 | टोयोटा के श्री विक्रम गुलाटी ने कहा कि यह साझेदारी भारत के ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है। |
| 👉 | मिराई शब्द का जापानी भाषा में अर्थ “भविष्य” होता है। |
| 👉 | फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग अब कार, बस, ट्रक, ट्रेन, जहाज और स्थिर बिजली प्रणालियों में किया जा रहा है। |
| 👉 | यह पहल उद्योग-अनुसंधान-सरकार सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। |
| 👉 | परीक्षण से प्राप्त जानकारी से भविष्य में हाइड्रोजन मोबिलिटी के व्यावसायीकरण में मदद मिलेगी। |
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📊 अपना स्कोर देखें1. हाइड्रोजन मोबिलिटी पायलट प्रोजेक्ट का उद्घाटन किस मंत्री ने किया?
2. पायलट परियोजना के तहत किस वाहन का भारत में परीक्षण किया जाएगा?
3. NISE और टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) किस तिथि को हस्ताक्षरित हुआ?
4. टोयोटा मिराई हाइड्रोजन FCEV की अनुमानित ड्राइविंग रेंज कितनी है?
5. हाइड्रोजन फ्यूल सेल वाहनों द्वारा उत्सर्जित एकमात्र उपोत्पाद क्या है?
6. भारत का राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन कब लॉन्च किया गया था?
7. NISE का पूरा नाम क्या है?
8. ‘मिराई’ शब्द का क्या अर्थ है?
9. पायलट परियोजना में वाहन का परीक्षण कितने समय तक किया जाएगा?
10. हाइड्रोजन फ्यूल सेल वाहन को रिफ्यूल करने में लगभग कितना समय लगता है?
11. इस पायलट प्रोजेक्ट का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
12. कार्यक्रम में उपस्थित टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के प्रतिनिधि का नाम क्या था?
13. हाइड्रोजन मोबिलिटी पायलट प्रोजेक्ट किस मंत्रालय से संबंधित है?
14. इस पहल का उद्देश्य भारत की किस प्रतिबद्धता के साथ संरेखित है?
15. किस प्रकार की साझेदारी इस पायलट परियोजना की विशेषता है?
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📋 Answer Key
- Q1: श्री प्रल्हाद जोशी
- Q2: टोयोटा मिराई FCEV
- Q3: 11 दिसंबर 2025
- Q4: 650 किलोमीटर
- Q5: जल वाष्प
- Q6: जनवरी 2023
- Q7: नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सोलर एनर्जी
- Q8: भविष्य
- Q9: 2 साल
- Q10: 5 मिनट से कम
- Q11: भारतीय परिस्थितियों में FCEV तकनीक का मूल्यांकन
- Q12: विक्रम गुलाटी
- Q13: नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
- Q14: पंचामृत जलवायु प्रतिबद्धताएं
- Q15: उद्योग-अनुसंधान-सरकार सहयोग
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